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संसद में गूंजा दिल्ली कोचिंग हादसा

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छात्रों की मौत का मुद्दा उठा चर्चा करवाने की मांग, मुख्य विपक्षी दल ने नहीं दी सहमति

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों तथा कुछ अन्य सदस्यों ने राजधानी के राजेंद्र नगर में एक कोङ्क्षचग संस्थान के बेसमेंट में तीन छात्रों की डूबने के कारण मौत का मुद्दा उठाते हुए सदन में सभी कामकाज रोक कर इस पर चर्चा कराने की मांग की। हालांकि मुख्य विपक्षी दल की सहमति नहीं मिलने पर सभापति ने कहा कि इस पर प्रश्नकाल के बाद नियम 176 के तहत अल्पावधि चर्चा होगी। सभापति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर नियम 267 के तहत कार्य स्थगन प्रस्ताव के नोटिस मिले हैं। ये नोटिस सर्वश्री सुधांशु त्रिवेदी, रामचंद्र जांगडा, सुरेंद्र नागर तथा आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल ने दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के मु्द्दे तथा कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने एक अन्य मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए नोटिस दिए हैं। उन्होंंने कहा कि युवा आबादी देश का भविष्य हैं, लेकिन देश में कोचिंग एक व्यवसाय बन गया है, जिससे युवा छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अखबारों के पहले पृष्ठ इससे संबंधित विज्ञापन से भरे रहते हैं। यह एक समस्या बन गई है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे के महत्त्व से अवगत हैं तथा मुख्य दल अगर सहमत हों तो वह इस पर चर्चा कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन बातचीत से पता चला है कि कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है। कुछ देर बाद सभापति ने प्रमुख दलों के नेताओं के साथ विचार विमर्श के बाद कहा कि यह मुद्दा युवाओं के तथा देश के भविष्य निर्माण से जुड़ा है, इसलिए इस पर प्रश्नकाल के बाद नियम 176 के तहत अल्पावधि चर्चा कराई जाएगी। इससे पहले सभापति ने सदन को भारतीय जनता पार्टी के सदस्य रहे प्रभात झा के निधन की जानकारी दी। उन्होंंने कहा कि श्री झा ने इस सदन में लगातार दो बार मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कहा कि श्री झा जाने माने पत्रकार, लेखक और समाजसेवी थे। उनके निधन से देश ने एक योग्य सांसद खो दिया है। सदस्यों ने दिवंगत सांसद को मौन रखकर श्रद्धांजलि भी दी।

शिक्षण संस्थानों की फीस पर सीमा लगाने का सुझाव

कांग्रेस पार्टी के रणजीत ङ्क्षसह सुरजेवाला ने कोङ्क्षचग संस्थानों के लिए विनियमन व्यवस्था किए जाने और शिक्षण संस्थानों की फीस पर सीमा लगाने का सुझाव दिया। श्री सुरजेवाला ने दिल्ली में कोङ्क्षचग संस्थान के भूमिगत तल में जलभराव के कारण छात्र छात्राओं की मृत्यु को मूलत: शिक्षा क्षेत्र के प्रति राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की पिछले दस वर्षों की उपेक्षा का परिणाम बताया। उनका कहना था कि इसे आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा के बीच राजनीति का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सरकार की नीतियों के कारण सरकारी स्कूल बंद हो रहे हैं और निजी स्कूलों का विस्तार हो रहा है। आज कोङ्क्षचग बहुत बड़ा व्यवसाय बन गया है और कोङ्क्षचग संस्थाएं इतनी शक्तिशाली हो गई हैं कि उनके आगे मुख्य धारा के शिक्षण संस्थान गौंण हो गए हैं।

छात्रों की मौत पर भावुक हुईं सांसद जया बच्चन, आंखें नम

समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने सोमवार को राज्यसभा में अपने भाषण के दौरान राजेंद्र नगर कोचिंग हादसे पर कहा कि यहां बैठे सभी लोगों ने मृतक बच्चों को श्रद्धांजलि दी लेकिन किसी ने भी उनके परिवारों के बारे में कुछ नहीं कहा, उनमें कुछ किसान थे। आज मैं यहां एक मां, एक दादी के रूप में बहुत दर्द के साथ खड़ी हूं। इस दौरान वह भावुक हो गईं और उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि हमें इसमें राजनीति नहीं लानी चाहिए। हमने तीन युवाओं को खोया है और ऐसे बहुत से युवा गए हैं। मैं तब से बैठकर यहां देख रही हूं, मैं कलाकार हूं, बॉडी लैंग्वेज समझती हूं, सब लोग अपना-अपना पि_ू फिट कर रहे हैं। यह गलत है। हमें करुणा और बुद्धिमत्ता के साथ बात करनी चाहिए।

राजनीति नहीं, जिम्मेदारी तय हो

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि कोचिंग संस्थानों को नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिल्ली के एक कोचिंग संस्थान में पानी भर जाने के कारण तीन यूपीएससी छात्रों की मौत पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। 27 जुलाई को दिल्ली के ओल्ड राजिंदर नगर में एक यूपीएससी कोचिंग सेंटर में तीन छात्रों की मौत पर राज्यसभा में एक संक्षिप्त चर्चा के दौरान भाग लेते हुए मंत्री ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। प्रधान ने कहा कि शोक संतप्त परिवारों को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि हमें जिम्मेदारी तय करनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने कहा कि कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। लापरवाही हुई है और किसी को जिम्मेदारी लेनी होगी, ताकि समाधान निकाला जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शिक्षा केंद्र के साथ-साथ राज्य की भी जिम्मेदारी है।