Himachal Pradesh

कर्मचारियों की एसीआर में अब नेगेटिव ग्रेडिंग

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हिमाचल के सरकारी क्षेत्र में सबसे बड़ा व्यवस्था परिवर्तन

एनुअल वर्क प्लान बनेगा, हर पद के लिए लक्ष्य तय होंगे

ऑनलाइन होगी एसीआर अगले वित्त वर्ष से लागू

संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे,

हिमाचल के सरकारी क्षेत्र में सबसे बड़ा व्यवस्था परिवर्तन होने वाला है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में गुरुवार को सरकारी कर्मचारियों की एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट यानी एसीआर की व्यवस्था को बदल दिया गया है। अब हर पोस्ट के सालाना लक्ष्य तय होंगे और अचीवमेंट आधारित ही प्रोमोशन प्रक्रिया रहेगी। राज्य सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की असेस्मेंट के लिए डिस्क्रिप्टिव ग्रेडिंग के बजाय न्यूमेरिकल ग्रेडिंग की व्यवस्था बनाई है। यानी एसीआर या एपीएआर में अब आउटस्टैंडिंग, वेरी गुड या एवरेज नहीं लिखा जाएगा, बल्कि काम के हिसाब से सिर्फ नंबर दिए जाएंगे। सबसे बड़ी बात यह होगी कि इसमें नेगेटिव ग्रेडिंग भी होगी। यदि कर्मचारियों ने कोई गलत एक्शन किया है या कोई एक्शन ही नहीं किया है, तो भी एसीआर से नंबर कट जाएंगे। यदि किसी को नोटिस जारी हुआ है या एडवाइजरी जारी हुई है, तो भी नंबर कटेंगे। नंबर कटने की सूरत में कार्यकाल की पात्रता पूरी होने के बावजूद प्रोमोशन नहीं होगी।

इन्क्रीमेंट भी इसी से जुड़ा हुआ विषय रहेगा। हर विभाग में एनुअल वर्क प्लान बनेगा, जिसमें सभी पदों के लिए लक्ष्य तय होंगे। मसलन डीएफओ को साल में नई प्लांटेशन, पुरानी प्लांटेशन की इंस्पेक्शन और नर्सरी प्रोडक्शन के लक्ष्य अचीव करने होंगे। शिक्षकों को कक्षा का रिजल्ट, प्रिंसीपल को स्कूल का एनरोलमेंट जैसे लक्ष्य हासिल करने होंगे। राज्य सरकार अपने फ्लैगशिप कार्यक्रमों से भी एनुअल टारगेट बना सकती है। अप्रेजल के लिए भी सिर्फ तीन ही स्तर होंगे। एसीआर सिर्फ ऑनलाइन ही भरी जाएगी और हर साल 31 दिसंबर से पहले प्रक्रिया पूरी होगी। कैबिनेट में हुए फैसले के बाद कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव ने शुक्रवार को इस फाइल को भी क्लियर कर दिया। वह सेंट्रल डेपुटेशन पर भारत सरकार जा रहे हैं। अब कार्मिक विभाग पहले इस प्रक्रिया को नोटिफाई करेगा और फिर सभी महकमे इसे अपने यहां अपनाएंगे।

सरकारी क्षेत्र को जवाबदेह बनाने को सीएम की पहल

कैबिनेट में यह एजेंडा ले जाने वाले कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव अमनदीप गर्ग ने बताया कि वर्तमान में पूरे देश में कहीं इस तरह की व्यवस्था की जानकारी उन्हें नहीं है। भारत सरकार में भी ऐसा नहीं है। सरकारी क्षेत्र को जवाबदेह बनाने के लिए यह कदम मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उठाया है। आने वाले दिनों में इसका असर देखने को मिलेगा। अगले वित्त वर्ष से इसे हिमाचल में लागू किया जा रहा है। पहले चरण में ग्रुप ए और बी के लिए व्यवस्था बनेगी।