डाक्टरों की हड़ताल से डगमगाई हिमाचल की सेहत
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
हिमाचल प्रदेश के डाक्टर सरकार से नाराज हैं। उनकी नाराजगी न केवल चिकित्सकों को सही प्रोटेक्शन न ं मिल पाने से है, बल्कि कई और मुद्दे हैं, जिनको बार-बार सरकार से उठाने पर केवल आश्वासन मिल रहे हैं। अब जल्द ही उनकी मांगों को सरकार ने पूरा नहीं किया, तो आने वाले समय में यह लोग दोबारा से संघर्ष पर उतरेंगे, जिससे आम जनता को सबसे अधिक परेशानी होगी। इन दिनों देश भर के चिकित्सक संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि कोलकाता में एक महिला डाक्टर के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ है
हिमाचल प्रदेश में भी चिकित्सक विरोध में उतरे हैं, जिन्होंने शनिवार को चिकित्सा सेवाएं बाधित कीं। शनिवार सुबह से सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टर 24 घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक पर चले गए। हड़ताल से प्रदेश भर में ओपीडी सेवाएं प्रभावित हैं। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं जारी हैं। हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ के महासचिव डा. विकास ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था स्टेट हेल्थ प्रोटेक्शन एक्ट जो कि केंद्रीय हेल्थ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत है, को शीघ्र अति शीघ्र लागू किया जाए, क्योंकि यहां पर डाक्टरों के साथ अनैतिक व्यवहार की घटनाएं पूर्व में पेश आ चुकी हैं। इस संदर्भ में भी संघ ने चिकित्सकों की सुरक्षा के साथ-साथ हेल्थ इंस्टीट्यूशन में हैल्थ केयर पर्सन फॉर हैल्थ केयर प्रोफेशनल्स और इंस्टीट्यूशन प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन एक्ट के तहत नियम लागू करने की मांग कर रखी है, लेेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी इस समस्या को स्वास्थ्य विभाग के द्वारा दरकिनार कर दिया गया। आज भी हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था स्टेट हैल्थ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत नहीं है, जिससे उनमें नाराजगी है।
