स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में होली छात्रावास की बच्चियों के साथ कैदियों जैसा व्यवहार……
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
होली: 16 अगस्त की रात राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय होली में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक स्टार संध्या का आयोजन हुआ जिसमें होली कन्या छात्रावास की करीब 45 छात्राओं को छात्रावास में बन्द करके इस कार्यक्रम से वंचित रखा गया जबकि इसी छात्रावास के प्रांगण में हिमाचल प्रदेश के तीन प्रमुख लोकगायकों सहित कई दूसरे कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे थे इन बच्चियों को जानवरों की तरह छात्रावास परिसर में बन्द कर दिया गया जबकि इसके प्रांगण में क्षेत्र के सैंकड़ों लोग और स्कूल के अध्यापक और पूर्व विधायक और कई गणमान्य लोग इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे हैरानी की बात है कि स्कूल प्रबन्धन को इन बच्चियों पर जरा भी तरस नहीं आया क्यों इन बच्चियों को इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम से वंचित रखा गया यह समझ से परे है इस कार्यक्रम में कई सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ी फिर इन बच्चियों के साथ इतनी सख्ती क्यों ? मेरा सवाल स्कूल प्रबन्धन से यह है कि जब दूसरे बच्चे इस कार्यक्रम में भाग ले सकते है तो फिर दूरदराज के गांवों से शिक्षा ग्रहण कर रही यह बच्चियां क्यों नहीं ? दो दिनों तक तीन सौ बच्चों को पढ़ाई से वंचित रखा जा सकता है तो फिर 45 बच्चियों को मनोरंजन से वंचित करने का अधिकार स्कूल प्रबन्धन को किसने दिया ? स्कूल प्रबन्धन शायद कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटा था लेकिन एक ऐसी जमात बुद्धिजीवियों की भी बैठी थी उन्हे भी इन बच्चियों पर तरस नहीं आया और सभी अपना अपना मनोरंजन कर चलते बने और कार्यक्रम देखने की आस लगाए बैठी बच्चियां थक हारकर सो गई। हो सकता है कि मैं हम इस मामले में गलत हो लेकिन शोशल मिडिया में कई लोग है जोकि ऐसे मामलों में अपनी निष्पक्ष और बेबाक राय रखते है मुझे उम्मीद है कि इस मामले में लोग अपनी राय जरूर रखेंगे।
