प्रसाद पर विवाद दियोटसिद्ध में बिना किसी जांच बिकता है बाबा का रोट
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
मंदिर ट्रस्ट का कंट्रोल सिर्फ अपने किचन तक, प्रसाद की चैकिंग को लेकर किसी तरह के नियम तय नहीं
उत्तरी भारत का दियोटसिद्ध स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ बाबा बालक नाथ जी का मंदिर हिमाचल, पंजाब समेत कई राज्यों के श्रद्धालुओं का आस्था का केंद्र है। साल भर भक्तों का मंदिर में आना-जाना लगा रहता है। प्रसाद के रूप में रोट पौणाहारी को अर्पित किया जाता है। तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद का मामला विवादों में आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि प्रसाद की गुणवत्ता के मानक आखिर क्या तय किए गए हैं और क्या होने चाहिएं। दियोटसिद्ध मंदिर में बाबा को चढ़ाए जाने वाले रोट को लेकर जब पड़ताल की गई, तो पाया गया कि फिलहाल विशेष रूप से प्रसाद को चैक करने के कोई फिक्स मानक नहीं हैं। दुकानदार जो बनाते और बेचते हैं, वही खरीदा जाता है।
आस्था के चलते इस ओर न कभी किसी ने सवाल किया और न ही किसी का ध्यान इस ओर गया। दियोटसिद्ध में जितनी भी रोट प्रसाद की दुकानें हैं, मंदिर ट्रस्ट का उन पर कोई हस्तक्षेप नहीं है। ट्रस्ट केवल अपने किचन में बनने वाले प्रसाद और भंडारे के लिए बनने वाले भोजन पर चैक रखता है। प्रसाद को अन्य खाद्य व्यंजनों की तरह चैक करने की जिम्मेदारी फूड एंड सेफ्टी डिपार्टमेंट की है, लेकिन जांच के दौरान पाया गया कि विभाग भी केवल यहां हर साल लगने वाले मेलों के दौरान ही दुकानों का निरीक्षण करता है। बाकी कौन, कैसे, क्या बना रहा है, इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया है। दियोटसिद्ध में अप्पर और लोअर बाजार में दुकानों की बात करें, तो यहां लगभग 250 दुकानें हैं, जिनमें से 70 से 80 दुकानों में रोट प्रसाद बनाया जाता है।
