शरीर ने छोड़ा साथ; पर थामे रहे उम्मीदों का हाथ और पा लिया मुकाम
चंबा जिला के अजय कुमार ने दिव्यांग होने के बाद भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट-वॉलीबाल स्पर्धाओं में दिखाई प्रतिभा
विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे
हिमाचल और हिमाचलीयत की सेवा करने, प्रदेश की संस्कृति को बढ़ावा देने और देश-दुनिया में नाम कमाने वालों का ‘दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप’ हमेशा से सम्मान करता आया है। प्रदेश व समाज के लिए कुछ हटकर करने वालों को सम्मान हमारी प्राथमिकता में शामिल है। ऐसी ही प्रतिष्ठित विभूतियों, संगठनों व संस्थाओं के प्रयासों को प्रणाम करने का एक जरिया है ‘दिव्य हिमाचल एक्सिलेंस अवार्ड। इस बार भी ‘दिव्य हिमाचल एक्सिलेंस अवार्ड-2024’ की ‘सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी’ श्रेणी में शुमार हैं जिला चंबा के होनहार खिलाड़ी अजय कुमार …
‘कहते हैं कि प्रतिभा किसी चीज की मोहताज नहीं होती, परिश्रम करने वालों की कभी हार नहीं होती’। ये पंक्तियां जिला चंबा की ग्राम पंचायत बाट के प्रेहल्ला गांव के अजय कुमार पर बिलकुल सटीक बैठती हैं। अजय ने अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर की दिव्यांग क्रिकेट प्रतियोगिता में प्रदेश का नाम रोशन किया है। अजय बहुत अच्छे आलराउंडर हैं। इनकी इस उपलब्धि को देखते हुए वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव में जिला स्वीप आइकॉन भी बनाया गया था। इसके अलावा अजय जिला चंबा के यूथ स्पोट्र्स आइकॉन अवार्ड से भी सम्मानित हैं। अजय अब तक आठ नेशनल दिव्यांग क्रिकेट टूर्नामेंट में खेल चुके हैं। इसके अलावा भारतीय दिव्यांग ए-टीम में भी खेल चुके हैं। डिफरेंटली एबल क्रिकेट काउंसिलिंग ऑफ इंडिया यानी डीसीसीआई इंडिया-ए में प्लेयर ऑफ दि टूर्नामेंट बनने वाले अजय हिमाचल प्रदेश के पहले खिलाड़ी हैं। इसके साथ अजय पांच नेशनल और एक इंटरनेशल पैरा स्पोट्र्स में खेल चुके हैं।
अजय जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई गोल्ड और सिल्वर मेडल भी हासिल कर चुके हैं। अजय जिला चंबा के पहले अंतरराष्ट्रीय पैरा ओलंपिक वॉलीबल खिलाड़ी भी हैं, जिन्होंने कजाकिस्तान में देश का प्रतिनिधित्व किया है। अजय हिमाचल पैरा वॉलीबाल के कप्तान भी हंै। अजय बताते हैं कि जिंदगी में कई चुनौतियां आईं, मगर कड़ी मेहनत के जरिए उन्होंने इन चुनौतियों से पार पाया। मुकाम तक पहुंचने के लिए उनको 15 वर्षों की कड़ी मेहनत, लग्न और कडे संघर्षों का सामना करना पड़ा। अजय ने बताया कि कई बार निराशा हाथ लगी और कई बार सब छोडऩे का मन किया, लेकिन बड़े भाई की मदद से दोबारा अभ्यास शुरू किया। आज वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश व प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।(एचडीएम)
पढ़ाई में ही नहीं, खेलों में भी सबसे आगे अजय कुमार
अजय कुमार का जन्म एक छोटे से गरीब परिवार में हुआ। अजय के पिता आजीविका को चलाने के लिए बिजली बोर्ड ऑफिस के बाहर एक छोटी सी चाय की रेहड़ी चलाते हैं। अजय ने दसवीं की पढ़ाई प्रेहल्ला गांव से करीब पांच किलोमीटर बाट स्कूल से की है। राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चंबा में 11वीं की पढ़ाई कॉमर्स स्ट्रीम में शुरू की। अजय ने बारहवीं की शिक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। पढ़ाई में अव्वल रहने के साथ शुरू से ही खेलों में खास रुचि रखने वाले अजय ने इसी क्षेत्र में अपना भविष्य संवारा है।
एक हादसे ने बदल दी पूरी जिंदगी
दो अगस्त, 2017 को अजय रेहड़ी की तिरपाल को ठीक करते वक्त ऊपरी हिस्से से गुजर रही बिजली की हाई वोल्टेज की तार की चपेट में आ गए। करीब नौ दिन तक अजय कुमार क्षेत्रीय अस्पताल चंबा के आईसीयू वार्ड में कोमा में रहे। चिकित्सकों के मुताबिक अगर वह बच भी गए, तो उनकी टांग काटना ही पडेगी। शरीर में हर जगह घाव ही घाव थे। अजय के करंट लगने से शरीर का खून लगभग खत्म हो चुका था।
नौ दिन के बाद अजय कुमार के होश में आने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली। इसके बाद परिजनों ने अजय कुमार को उपचार के लिए टांडा पहुंचाया, मगर अजय कुमार की टांग बचाने के लिए परिजन उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ ले गए। जहां पांच ऑपरेशन के बाद चिकित्सकों ने अजय कुमार की टांग बचा ली। इस ऑपरेशन पर करीब 15 लाख रुपए खर्च हुए। यह सारा खर्च परिजनों ने गहने बेचकर और बैंक से लोन लेकर वहन किया। अभी अजय के दो मेजर ऑपरेशन और होने हैं, मगर ऑपरेशन के भारी- भरकम खर्च को वहन करने में पारिवारिक सदस्य असमर्थ हैं।
