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Milk Plant : 250 करोड़ के मिल्क प्लांट का इस दिन होगा शिलान्यास

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सीएम सुखविंदर सुक्खू करेंगे शुभारंभ, प्रतिदिन 20 हज़ार से बढक़र अब डेढ़ लाख लीटर होगी क्षमता

संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे

दो अक्तूबर को महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के दिन धर्मशाला के नजदीक ढगवार में बनने वाले 250 करोड़ के मिल्क प्लांट का शिलान्यास किया जाएगा। मौजूदा ढग़वार मिल्क प्लांट की प्रति दिन 20 हज़ार लीटर की क्षमता को बढ़ाकर अब जल्द ही डेढ़ लाख लीटर किया जा सकेगा। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू दो अक्तूबर को धर्मशाला के दौरे के दौरान मिल्क प्लांट के कार्यों का विधिवत पूजा-पाठ के साथ शुभारंभ करेंगे। इसके लिए शुरुआती 76 कनाल भूमि में जर्जर भवनों को हटा दिया गया है, जबकि शिलान्यास करवाने की भी प्रशासन व विभाग की पूरी तैयारियां कर ली हैं। इस प्लांट के लिए नाबार्ड से 250 करोड़ रुपए बजट का प्रावधान किया गया है। मिल्क फेडरेशन को प्रथम किस्त के तौर पर 60 करोड़ रुपए भी जारी हो चुके हैं। नेशनल डेयरी डिवेलपमेंट बोर्ड को इस प्लांट के निर्माण का जिम्मा सौंपा गया है।

प्लांट के तैयार होने के बाद हिमाचल प्रदेश मिल्क फेडरेशन इस दुग्ध प्रसंस्करण प्लांट का संचालन करेगा। आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण प्लांट में दूध से बनने वाले उत्पादों की संख्या में भी इजाफा होगा। दही, लस्सी, मक्खन, घी, पनीर, फ्लेवर्ड मिल्क, खोया और मोजरेला चीज सहित कई तरह के उत्पाद तैयार किए जाएंगे। ढगवार मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट को स्तरोन्नत करने का मुख्य उद्देश्य कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, चंबा और ऊना जिलों के किसानों की आर्थिकी को मजबूत करना है। वर्तमान में परेल, लाल सिंघी, बिंद्रावन, जलाड़ी, बंगाणा और मीलवां से दूध प्लांट में प्रसंस्करण के लिए आ रहा है। उधर, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी एडीएम डा. हरीश गज्जू ने बताया कि धर्मशाला के ढगवार में अत्याधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण प्लांट बनाने के लिए कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा। सीएम सुक्खू से शिलान्यास करवाने को लेकर बातचीत चल रही है।

कांगड़ा में 205 दुग्ध उत्पादन इकाइयां, 41 पंजीकृत

पशुपालन विभाग से कांगड़ा में लगभग 205 दुग्ध उत्पादन इकाइयों की पहचान हो चुकी है। इसमें से 41 इकाइयों का पंजीकरण भी हो चुका है। किसानों एवं पशुपालकों को घर-द्वार ही दूध के उचित दाम मिलेंगे और उन्हें दूध बेचने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। पशुपालन विभाग की ओर से दूध एकत्रीकरण सोसायटियों (कलेक्शन सोसायटियों) का भी गठन किया जा रहा है।