Himachal Pradesh

हाइड्रोजन बसों के लिए फिजिबिलिटी देखेगा निगम

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मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद एचआरटीसी की पहल, ट्रकों में भी लाभदायी है हाइड्रोजन

संदीप भारद्वाज ट्राइबल टुडे
हिमाचल प्रदेश में हाइड्रोजन बसों के लिए फिजिबिलिटी देखी जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशों के बाद एचआरटीसी हरकत में आया है और प्रधान सचिव परिवहन ने अधिकारियों को इस संबंध में रिपोर्ट बनाने को कहा है। इसमें संबंधित कंपनियों से बात की जाएगी और यहां पर संभावनाएं देखी जाएंगी कि आखिर हाइड्रोजन से चलने वाली बसें कितनी कामयाब हैं। यहां पर किस तरह से हाइड्रोजन बसों का इस्तेमाल होगा और उसके लिए क्या-क्या रिक्वायरमेंट रहेंगी, इसका पूरा अध्ययन करने के बाद कैबिनेट को रिपोर्ट दी जाएगी। हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह कहा था कि हाइड्रोजन से बसों को चलाया जाएगा, जिसका खर्चा काफी कम रहेगा।
इससे एचआरटीसी को लाभ मिलेगा, क्योंकि अभी उसकी बसें डीजल से चलती हैं और डीजल पर काफी ज्यादा खर्च आ रहा है। परिवहन निगम के पास जो इलेक्ट्रिक व्हीकल हैं, उनसे भी उसे फायदा मिल रहा है। दूसरी तरफ प्रदेश में हाइड्रोजन का प्लांट कहां पर लगेगा और उसे कहां-कहां पर बढ़ाया जा सकता है, यह भी देखना होगा। बताया जा रहा है कि बसों के साथ ट्रकों में भी हाइड्रोजन का इस्तेमाल हो रहा है और परिवहन निगम को उस दिशा में भी काम करना होगा। पिछले दिनों सीएम से इस संबंध में एक कंपनी के प्रतिनिधि मिले भी थे, जो यहां पर प्लांट लगाने की सोच रखते हैं।
निगम के पास डीजल और बिजली से चलने वाली गाडिय़ां
एचआरटीसी के बेड़े में डीजल व इलेक्ट्रिक बसें हैं। डीजल बस संचालन का खर्चा 65 से 70 रुपए प्रति किलोमीटर है। विद्युत चालित बस का खर्चा 20 से 25 रुपए है। ग्रीन हाइड्रोजन से बसों को चलाने का जो प्रारंभिक आकलन किया गया