Himachal Pradesh

टूरिज्म सर्किट से जुड़ेंगे लोअर हिमाचल के पर्यटक स्थल

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विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे

पहाड़ के साथ मैदानी क्षेत्रों में बढ़ेंगी सुविधाएं; 600 करोड़ से बन रहे ज़ू ने पकड़ी रफ्तार, पौंग में वाटर स्पोट्र्स एक्टिविटी भी बढ़ीं

धर्मशाला, मकलोडगंज, डलहौजी, बीड़ बिलिंग सहित अन्य पयर्टन स्थल अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर हैं। प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बसे इन ख्याति प्राप्त स्थानों पर हर साल देश-विदेश से लाखों सैलानी आते हैं। इन पर्यटक स्थलों को कागड़ा-चंबा सहित साथ लगते ऊना व हमीरपुर जिलों के मैदानी इलाकों से जोडऩे को टूरिज्म सर्किट बनाया जा रहा है। कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने के लिए अन्य परियोजनाओं के अलावा कांगड़ा के देहरा में बन रहे करीब 600 करोड़ के इंटरनेशनल जूलॉजिकल पार्क से सैलानियों को मैदानी क्षेत्र में वन्य प्राणी जीवों के देखने के लिए करीब 238 हेक्टेयर के बड़े पैच ऑफ लैंड को चयन किया गया है। प्रसिद्व शक्तिपीठ चिंतपूर्णी व मां ज्वालामुखी के अलावा माता बगलामुखी में हर साल लाखों धार्मिक श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में उन्हें देहरा में बड़े चिडिय़ाघर को देखने और वहां ठहरने का प्रबंध किया जा रहा है।

इतना ही नहीं, साथ सटे पौंग बांध में शिकार व क्रूज सहित अन्य वाटर स्पोटस एक्टिविटी चलाकर सैलानियों को पहाड़ के साथ साथ मैदानी क्षेत्र में नए सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। देहरा में अंतरराष्ट्रीय स्तर के जू के लिए बाउंडरी वाल लगाने सहित पौंड बनाने का काम चल रहा है। हिमुडा के एक्सईएन अनिल सूद का कहना है कि बाउंडरी वाल का काम करीब दो किलोमीटर तक पूरा कर लिया गया है। इसी तरह चैक डैम भी करीब आठ तक बना लिए गए हैं। उधर, एसडीएम देहरा शिल्पी वेक्टा का कहना है कि जू का कार्य शुरू हो चुका है। पर्यटकों के आकर्षण के लिए यह बेहतर स्थल होगा। उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा का कहना है कि कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। देहरा में बनने वाले जूलॉजिकल पार्क का कार्य तेजी से चल रहा है।

कुछ इस तरह का होगा चिडिय़ाघर

पहले चरण में जैव विविधता सुनिश्चित करते हुए 34 पशुओं के बेड़े बनाए जाएंगे और इसके लिए सरकार को केंद्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण से मंजूरी मिल चुकी है। इस जू में एशियाई शेर, हॉग डियर, मॉनिटर छिपकली, मगरमच्छ, घडिय़ाल और विभिन्न पक्षियों की प्रजातियों सहित लगभग 78 प्रजातियों के जावनरों को रखा जाएगा। चिडिय़ाघर में एक नॉक्टर्नल हाउस बनाया जाएगा, जिसमें बिल्लियों की प्रजातियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा, चिडिय़ाघर में एक वेटलैंड एवियरी में स्वदेशी प्रजातियों के पक्षियों को प्रदर्शित किया जाएगा। यहां पर लैपर्ड सफारी, पंचवटी पार्क, मोनो रेल, वायोडावर्सिटी पार्क सहित कई तरह की सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी।