EducationHimachal Pradesh

पढ़ाएं या पेशियां भुगतें, शिक्षा विभाग पर 12584 कोर्ट केस

Spread the love

बढ़ती लिटिगेशन से शिक्षा विभाग के हाल खराब, सबसे ज्यादा लगभग एक लाख कर्मचारी इसी विभाग में

संवाददाता विनोद ठाकुर ट्राइबल टुडे,
कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से हिमाचल के सबसे बड़े सरकारी महकमे शिक्षा विभाग का आजकल अदालतों में चल रहे मामलों के कारण बुरा हाल है। ये मामले लोअर कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक चल रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में सर्विस मैटर्स के बजाय कांट्रैक्ट सीनियोरिटी, एरियर, बैक डोर भर्तियों और प्रोमोशन जैसे झगड़ों के कारण हालत यह है कि विभाग पढऩे-पढ़ाने पर कब ध्यान दे। दोनों निदेशालयों का लीगल सेल और सचिवालय की लीगल ब्रांच अदालत में चल रहे मामलों के जवाब तैयार करने में जुटी है और अफसर केस अटेंड करने में। चिंता की बात यह है कि लिटिगेशन कम कैसे हो, विभाग के भीतर यह मेकैनिज्म काम नहीं कर रहा। शिक्षा विभाग के कुल 12584 कैसे अलग-अलग अदालतों में हैं।
इनमें से 10824 मामलों में फैसला भी आ गया है, लेकिन इसे लागू करने, आगे अपील करने या इसके इंपैक्ट पर राज्य सरकार से चर्चा करने में विभाग उलझा है। अभी भी 1760 मामले पेंडिंग चल रहे हैं। इनमें से 1687 या तो सिविल रिट पिटीशन हैं, जो सीधे हाई कोर्ट में दायर हुई हैं या प्रशासनिक ट्रिब्यूनल से हाई कोर्ट आई हुई याचिकाएं हैं। 25 मामले सिविल ओरिजिनल पिटीशन कंटेंप्ट यानी अवमानना के चल रहे हैं। विभाग के ऊपर 48 एग्जीक्यूशन पिटिशन कोर्ट में चल रही हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट के आंकड़े देखें, तो स्पेशल लीव पिटिशन यानी सीएलपी 23 मामलों में चल रही है, जबकि एक कंटेंप्ट पिटिशन भी सुप्रीम कोर्ट में अभी लंबित है। यदि मानव संसाधन की बात करें, तो राज्य में शिक्षा विभाग के पास ही सबसे ज्यादा कर्मचारी हैं। करीब एक लाख सृजित पद एलिमेंट्री और उच्च शिक्षा विभाग में हैं। विश्वविद्यालय को मिला दिया जाए, तो संख्या और बढ़ जाती है। इनमें से 70000 सिर्फ शिक्षक ही हैं। बाकी 30000 गैर शिक्षक कर्मचारी हैं। सर्विस मैटर के अलावा कांट्रैक्ट पॉलिसी, सीनियोरिटी और वित्तीय लाभों से संबंधित मामले अब आ रहे हैं। शिक्षा विभाग में पूर्व की सरकारों के दौरान हुई बैक डोर भर्तियों से संबंधित मामले भी अचानक बढ़े हैं।